Prabhu Ko Pane Ka Rasta :

हँसि हंसि कंत न आइया, जिन पाया तिन रोय।
हांसी खेलां पव मिले, तो कौन दुहागिन होय।।
अर्थः-संसार के आमोद-प्रमोद में हँस-हँस कर किसी ने सच्चे मालिक का दर्शन नहीं पाया। जिसने भी मालिक का दर्शन पाया है तो विरह की पीड़ा में रो-रो कर पाया है। यदि सांसारिक सुख-भोगों में हंसते-खेलते मालिक की प्राप्ति हो सकती तो फिर सारा संसार ही प्राप्त कर लेता, फिर किसी को भी उसके योग (मिलन) से वंचित न रहना पड़ता।

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